मुट्ठी में कुछ सपने लेकर भरकर जमा में आशाएं दिल में है अरमान यही कुछ कर जाएं कुछ कर जाएं मैं उस माटी का वृक्ष नहीं जिसने नदियों में सिंचाई बंजर माटी में पलकर मैंने मृत्यु से जीवन खींचा है मृत्यु से जीवन कैसा है सूरज सा तेज नहीं मुझ में लेकिन दीपक जैसा जलतापढ़ना जारी रखें “जीवन का पहला सफर”